मालवीय स्मृति एकेडमी
मालवीय स्मृति एकेडमी, बड़ागांव - मऊ (उ.प्र.) का संक्षिप्त इतिहास-तमसा नदी की साझी संस्कृति तथा उर्वरा मिट्टी समय-समय पर ऐसे सपूतों को जन्म देती रही है, जिनका नाम इस अंचल के ही नहीं बल्कि भारतीय शिक्षा के इतिहास में सुनहरे पन्नों पर स्वर्णिम अक्षरों में अंकित है। आज मनुष्य अपने कर्तव्यों, मूल्यों, आदशों तथा परम्पराओं को छोड़कर आधुनिक सभ्यता के अनुसार खुद को बदलने का प्रयत्न कर रहा है, यह सही भी है क्योंकि विकास तभी होगा जब बदलाव होगा किन्तु यहाँ यह कहना गलत नहीं होगा कि अपनी परंपराओं में बदलाव तो सही है लेकिन उन्हें छोड़ना गलत है। आज समाज को एक ऐसी शिक्षा पद्धति की जरूरत है जो समाज को विकास के सर्वोच्च स्तर पर उसकी परंपरा और संस्कृति के साथ लेकर जायें, उसे भुलाकर नहीं। इसी उद्देश्य को नींव बनाकर जनपद-मऊ के ग्रामीण क्षेत्र ग्राम बड़ागांव - मऊ (उ.प्र.) में सन् 2012 में महाविद्यालय की स्थापना हुई और आज महाविद्यालय उसी उद्देश्य को पूरा करता हुआ विकास के शिखर पर पहुंचते हुए लगभग विश्वविद्यालय का स्वरूप हांसिल कर चुका है।
इसी कड़ी को आगे बढ़ाने के लिए श्री सुधीर कुमार राय भले ही अपने समय में उच्च शिक्षा से वंचित रहे हों लेकिन उच्च शिक्षा न प्राप्त कर पाने की कसक उनको लगातार पीड़ा देती रही। इस कसक को उन्होंने हमेशा महशूस किया और अंततः यह कसक एक सुनहरे स्वप्न में परिणित हुई और इसी स्वप्न को साकार करने के लिए इस अंचल में उच्च शिक्षा का यह नन्हा पौधा "मालवीय स्मृति एकेडमी" के माध्यम से श्री सुधीर कुमार राय जी ने 'मालवीय स्मृति एकेडमी, बड़ागांव - मऊ (उ.प्र.)' की स्थापना करके अपने उन सपनों को इस आशा और विश्वास के साथ साकार किया कि यह नन्हा कंदील एक दिन बोधि-वृक्ष के रूप में पुष्पित और पल्लवित होगा।
मालवीय स्मृति एकेडमी का एक आदर्श वाक्य है “असतो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय”। अतः इस महाविद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थियों से अपेक्षा की जाती है कि वे महाविद्यालय के आदर्श वाक्य में निहित भावना को अपने आचरण एवं चरित्र के माध्यम से कार्य में परिणत करें। महाविद्यालय समाज का लघु रूप है, यहाँ विभिन्न जाति, धर्म एवं सम्प्रदाय के विद्यार्थी अध्ययन करते हैं। उनसे राष्ट्रीय व्यक्तित्व और चरित्र की अपेक्षा की जाती है। विद्यार्थियों से यह भी अपेक्षा की जाती है कि वे कॉलेज परिसर में स्वस्थ वातावरण का निर्माण करें, तभी वे आदर्श विद्यार्थी बन सकेंगे।
मालवीय स्मृति एकेडमी
समुदाय की स्वास्थ्य देखभाल आवश्यकताओं और उद्योगों के तकनीकी पहलुओं में सुधार के लिए उत्कृष्ट शिक्षा और अनुसंधान प्रदान करके एक प्रतिष्ठित संस्थान बनना।
मालवीय स्मृति एकेडमी
मालवीय स्मृति एकेडमी, बड़ागांव - मऊ (उ.प्र.) अपने उच्च आदर्शों को लेकर शैक्षिक जगत में अपनी पहचान बनाने के लिए उत्कृष्टता के समस्त मानकों को पूरा करने का आश्वासन देता है। यह महाविद्यालय शैक्षिक अकादमिक क्रियाओं के माध्यम से इस अंचल में एक नया मानक गढ़ने के लिए अग्रसर है। अपनी गुणवत्तापूर्ण शिक्षण प्रणाली और अनुभवी शिक्षकों के माध्यम से इस अंचल में अपनी एक अलग पहचान बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह सत्य है कि किसी नई संस्था को लोगों के विश्वास पर खरा उतरने में, एक लंबा समय लगता है और उस विश्वास को बरकरार रखने में उसे दिन-रात परिश्रम करना पड़ता है। लेकिन एक दिन इस परिश्रम का प्रतिफल लोगों के विश्वास, लोगों की आस्था के रूप में प्राप्त होता है। हम इस बात में विश्वास रखते हैं कि समय के साथ संस्था के उच्च मानक को देखकर लोग कहें कि यह महाविद्यालय अपनी वाणी और कर्म में एक समानता रखता है। इस अंचल में प्राकृतिक वातावरण में स्थापित यह महाविद्यालय अपनी दूरदृष्टि और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए ज्ञान-विज्ञान, साहित्य, पाठ्य सहगामी क्रियाएं एवं सकारात्मक सोच के साथ निरंतर संस्कार बद्ध होकर ज्ञान के उस परचम को लहराएगा की लोग इस अंचल में इस संस्था को बड़ी ही निष्ठा और सम्मान की दृष्टि से देखें । आने वाले नवागंतुक छात्र /छात्राओं को आश्वस्त करना चाहते हैं कि आगामी भविष्य में यहाँ खेलकूद के उत्तम साधन, पठन-पाठन की उत्तम व्यवस्था, ज्ञान विज्ञान, की स्तरीय पुस्तकों से सुसज्जित लाइब्रेरी और अनुशासन उनके भविष्य को निश्चित रूप से उज्ज्वल बनाएगा। हम उनके विश्वास पर खरे उतरने के लिए प्रतिबद्ध हैं ।
मालवीय स्मृति एकेडमी